Saturday, August 8, 2020
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कोरोना खत्म होने के बाद जरूर जाएं लेह-लद्दाख, होगा जन्नत जैसा एहसास

लेह-लद्दाख (Leh- Ladakh) एक बेहद खूबसूरत टूरिस्ट डेस्टिनेशन है. यह स्थान अधिकतर पर्यटकों की सूची में सबसे ऊपर रहता है लेकिन यह एक बेहद ही ठंडा (Cold) इलाका है. नीला आसमान, विशाल बंजर पहाड़ और झील का साफ सुथरा नीला पानी ये सब ऐसी चीजें हैं जो आपको केवल लद्दाख में ही देखने को मिलेंगी. इसे मुख्य रूप से बौद्ध धर्म के अनुयायियों की आस्था का केन्द्र तथा तिब्बत शरणार्थियों के रहने की जगह माना जाता है. लेह समुद्र तल से लगभग 3524 मीटर की ऊंचाई पर स्थित भारत का सबसे ऊंचा रहने योग्य स्थान है. यहां के परम्परागत त्यौहार (Festivals), बौद्ध मठ (Monastery) और उनकी संस्कृति किसी को भी अपनी ओर आकर्षित करने में सक्षम है. हिमाचल पर्वतमाला के काराकोरम, जंसकार और लद्दाख की पहाड़ियों के बीच बसा यह स्थान रोमांचकारी अनुभवों के साथ साथ मानसिक शांति (Mental Peace) भी प्रदान करता है.

लेह, लद्दाख का हेडक्वॉर्टर है
मई के अंतिम सप्ताह से लेकर सितंबर तक लद्दाख जा सकते हैं. यहां सड़क या हवाई मार्ग से ही पहुंचा जा सकता है. सड़क से जाना चाहें, तो एक रास्ता मनाली और दूसरा श्रीनगर होते हुए है. दोनों ही रास्तों पर दुनिया के कुछ सबसे ऊंचे दर्रे यानी पास पड़ते हैं. मई से पहले और सितंबर के बाद यहां भारी बर्फ जम जाने की वजह से ये पास बंद हो जाते हैं. कोरोना के बाद क्या आप लेह-लद्दाख जाना चाहेंगे, अगर हां तो हम आपको बताते हैं कि लेह-लद्दाख में क्या क्या देखने योग्य है.

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लेह, लद्दाख का हेडक्वॉर्टर है, लद्दाख घूमने के लिए कम से कम 6 दिन का समय जरूर रखें. मनाली वाले रास्ते पर लेह से शे, थिक्से और हैमिस मोनेस्ट्री के अलावा स्तोक पैलेस और सिंधु नदी के तट पर जा सकते हैं. वहीं श्रीनगर वाले रास्ते पर लेह से आल्ची और लिकिर मोनेस्ट्री के अलावा मैग्नेटिक हिल जा सकते हैं. इसके अलावा दुनिया की सबसे ऊंची सड़क देख सकते हैं. यह सड़क नुब्रा घाटी वाले रास्ते पर खारदुंगला जाते हुए पड़ती है. नुब्रा घाटी और पैन्गॉन्ग लेक जरूर देखें.

माथो मठ लेह
यह मठ फरवरी व मार्च में होने वाले ओरेकल त्योहार के लिए जाना जाता है. इस त्यौहार के दौरान यहां दिल दहला देने वाले करतब भी देखने को मिल सकते हैं. यहां के संग्रहालय भी देखने योग्य हैं.

लेह महल

शहर के मध्य मे स्थित इस महल की खासियत यह है कि इसे नौ तलों मे बनाया गया है. लेह महल का निर्माण 16वीं शताब्दी मे सिंग नामग्याल ने करवाया था. इस महल में भगवान बुद्ध के जीवन को दर्शाती चित्रकारी देखने योग्य है,

जोरावर का किला
एक उथली खाई से घिरा जोरावर का किला बहुत ही खुबसूरती से मिट्टी से बनाया गया विशाल किला है. जोरावर किले का इस्तेमाल आजकल भारतीय सेना द्वारा खच्चरों व टट्टुओं को रखने के लिए किया जाता है.

गुरुद्वारा पत्थर साहिब
गुरुद्वारा पत्थर साहिब की लेह से दूरी 20 किलोमीटर है. यहां एक शिला पर मानव आकृति उभरी हुई है. माना जाता है कि यह आकृति सिखों के प्रथम गुरु नानकदेव जी की है.

हैमिस नेशनल पार्क
हैमिस नेशनल पार्क लद्दाख के पूर्वी क्षेत्र में स्थित है. यह भारत का सबसे बड़ा संरक्षित क्षेत्र माना जाता है. यह लगभग 4400 वर्ग किलोमीटर में फैला है. यहां आप हिम तेंदुआ, तिब्बती भेड़ें, तिब्बती भेड़िया, भालू, लोमड़ी, गोल्डन ईगल, गिद्ध जैसे वन्य जीव देख सकते हैं.

जन्स्कर घाटी
कारगिल से आगे नुन और कुन की जुड़वा चोटियां हैं. यह लद्दाख की सबसे ऊंची चोटियां हैं और आगे बढ़ने पर बर्फ की ऊंची ऊंची चोटियां चारों ओर आकर्षित करने लगती हैं. यहां से जन्स्कर घाटी का एकमात्र प्रवेशद्वार है. जन्स्कर सबसे ठंडे आबादी वाले स्थानों में से एक है.

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